परिंदा पोस्ट -शिवराम अठ्या
2500 छात्र, 250शिक्षक और 200 करोड़ का बजट, फिर भी आधे से ज़्यादा फेल बकस्वाहा के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
छतरपुर । शिक्षा के नाम पर सरकारें अरबों रुपए खर्च कर रही हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर है और सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही हैं। मध्यप्रदेश छतरपुर ज़िले के बकस्वाहा ब्लॉक के 16 सरकारी हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों का 2025 की बोर्ड परीक्षाओं में प्रदर्शन इतना शर्मनाक और खराब रहा कि न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जिस पर शिक्षा विभाग आत्ममंथन के साथ साथ इसकी जवाबदेही भी तय नहीं कर पा रही हैं।
2500 छात्र, 250 शिक्षक और 200 करोड़—फिर भी परिणाम शर्मनाक!
इन स्कूलों में करीब 2500 छात्र अध्ययनरत हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए लगभग 250 शिक्षक नियुक्त हैं। वेतन, संसाधन, मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति, निर्माण व अन्य योजनाओं के तहत प्रतिवर्ष करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद परीक्षा परिणामों में आधे से ज़्यादा छात्र फेल हो गए हैं।
एक नजर हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में चौंकाने वाले आंकडों पर जहां 9 में से 6 स्कूलों में 30% से भी कम परिणाम
क्र. 1- विद्यालय का नाम- शासकीय हाई स्कूल बालक बकस्वाहा –परीक्षा परिणाम (%) 20.00,
क्र. 2- शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बकस्वाहा- परीक्षा परिणाम (%) 20.77
क्र. 3- शासकीय कन्या हाई स्कूल बकस्वाहा – परीक्षा परिणाम (%) 23.50
क्र. 4- शासकीय हाई स्कूल बम्हौरी- परीक्षा परिणाम (%) 21.61
क्र. 5 -शासकीय हाई स्कूल निमानी – परीक्षा परिणाम (%)27.27
क्र. 6 -शासकीय हाई स्कूल गढ़ीसेमरा – परीक्षा परिणाम (%) 30.00
क्र. 7 – शासकीय हाई स्कूल गड़ोही-परीक्षा परिणाम (%) 32.40
क्र. 8- शासकीय हाई स्कूल पड़रिया- परीक्षा परिणाम (%)37.77
क्र. 9-शासकीय हाई स्कूल बाजना -परीक्षा परिणाम (%) 48.55
इनमें से तीन स्कूल ऐसे हैं जहां हर पाँचवां छात्र भी पास नहीं हो सका।
हायर सेकेंडरी परीक्षाः हालात और भी बदतर
क्र.1- विद्यालय का नाम- शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक बकस्वाहा, परीक्षा परिणाम (%) 11.81
क्र. 2- पीएम श्री कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बकस्वाहा,परीक्षा परिणाम (%) 17.54
क्र. 3- सीएम राइज मॉडल स्कूल बकस्वाहा, परीक्षा परिणाम (%) 45.36
क्र. 4- शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बम्होरी, परीक्षा परिणाम (%) 11.54
यहां भी 80% से अधिक छात्र फेल हो गए, जिससे साबित होता है कि बुनियादी शिक्षा ही संकट में है।
250 शिक्षकों की पर्याप्त उपस्थिति, संसाधनों की भरमार, सरकारी योजनाएं और करोड़ों का बजट—फिर भी ऐसा परिणाम, यह दर्शाता है कि शिक्षण कार्य में गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक निष्क्रियता की तरफ इशारा करते हैं। या फिर शिक्षा तंत्र ही जड़ से असंवेदनशील हो चुका है।
अब सवाल उठ रहे हैं— क्या शिक्षक सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने और वेतन उठाने तक सीमित हैं,क्या छात्रों के भविष्य को लेकर कोई जवाबदेही तय नहीं की जाएंगी।
बीईओ का बचाव—‘समय की कमी रही कारण’
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सत्यम चौरसिया ने परीक्षा परिणामों की खराबी का कारण बताते हुए कहा कि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में अतिशेष शिक्षकों की पदस्थापना और अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति अधूरी थी। पढ़ाई देर से शुरू हुई और फरवरी में परीक्षा हो गई, जिससे छात्रों को तैयारी का समय कम मिला। लेकिन यह बयान खुद शिक्षा विभाग की योजना और पूर्वानुमान की कमी को उजागर करता है। अगर समस्याएं पहले से थीं, तो उनका समय रहते समाधान क्यों नहीं किया गया?
सवाल वही—कब होगी जवाबदेही तय
क्या सिर्फ ‘समय की कमी’ कह देने से शिक्षा व्यवस्था को दोषमुक्त किया जा सकता है? क्या शिक्षा विभाग अब भी केवल आंकड़ों का खेल खेलने में जुटा रहेगा? जनता, अभिभावक और छात्र जवाब चाहते हैं।
अगर नहीं जगे, तो परिणाम शून्य पर सिमट सकते हैं
बकस्वाहा के इन आंकड़ों ने प्रदेशभर की सरकारी शिक्षा प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। यदि अब भी ज़िम्मेदार अफसरों और शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आगे की तस्वीर और भयावह हो सकती है।
जनता पूछ रही है—कब सुधरेगा सरकारी स्कूलों का स्तर
हज़ारों बच्चों का भविष्य अधर में लटका है। यह सिर्फ बकस्वाहा की नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की समस्या है। अब वक्त आ गया है कि शिक्षा विभाग प्रदर्शन आधारित जवाबदेही तय करे और दिखावे से बाहर निकलकर वास्तविक सुधार लागू करे।
इनका कहना है कि….
खराब परीक्षा परिणामों के बारे में आर.पी. प्रजापति, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि इस संबंध में जिला कलेक्टर महोदय समीक्षा बैठक लेंगे, उनके निर्देशानुसार, नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
तो वहीं पार्थ जैसवाल, कलेक्टर छतरपुर ने बताया हम 10वीं-12वीं परीक्षा परिणामों की समीक्षा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि कमियां कहाँ रहीं। इसके बाद ठोस निर्णय लिया जाएगा।
Author: Parinda Post
सरहदें इंसानों के लिए होती हैं, परिंदा तो आज़ाद होता है !


