बकस्वाहा में लाल बागचा राजा थीम पर सजाई गई गणेश बाप्पा की भव्य झांकी, भक्ति-आस्था और उत्सव में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब

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आशीष चौरसिया बकस्वाहा । इस साल बकस्वाहा के बड़ा बाजार में लाल बागचा राजा थीम पर सजाई गई भव्य झांकी पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनी हैं। कभी साधारण सा दिखने वाला बकस्वाहा का बड़ा बाजार इन दिनों किसी महाकाव्य के दृश्य जैसा नजर आ रहा है। शाम ढलते ही रोशनियों से जगमगाता मुंबई के लाल बागचा राजा थीम पर आधारित गणेश पंडाल की भव्य झांकी को देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और मन ठहर सा जाता हैं, लगता हैं जैसे मन श्रद्धांलुओं को किसी अलौकिक दुनिया में ले जाता हो। मुंबई का लाल बागचा राजा अब मात्र किताबों और टीवी में नहीं,बल्कि यहां बकस्वाहा के श्रद्धांलुओं की धड़कनों में बस गया है। यहां का नजारा देखते ही बनता हैं, पंडाल में प्रवेश करते ही हजारों श्रद्धालु नतमस्तक हो जाते हैं। क्या बच्चे,क्या बुज़ुर्ग, क्या महिलाएं—हर कोई यहां की भव्यता देखकर विस्मित हो जाता है।

गणेश दादा समिति के सदस्य मयंक असाटी बताते हैं कि पूरा एक साल इस तैयारी में गुज़र गया, लेकिन आज जब नगरवासियों के चेहरों पर आनंद देखता हूं तो लगता है, हमारी मेहनत सफल हो गई।

जब कृष्ण जन्म पर थिरक उठा पंडाल

शनिवार की संध्या श्रीमद्भागवत कथा के दौरान जब व्यासपीठ पर बैठे पंडित राघवेंद्र मिश्रा महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा छेड़ी, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। जैसे ही घोष हुआ,नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की तो हजारों गले एक साथ गूंजे और पंडाल तालियोंकी आवाज़, नृत्य और अलौकिक उत्साह से भर उठा। नन्हे-मुन्ने जब श्रीकृष्ण का रूप धरकर मंच पर आए, तो श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने लगे।

नगर का गौरव बनता उत्सव

यह आयोजन अब केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि नगर की पहचान बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गणेश दादा समिति ने इस बार इतिहास रच दिया, लगता हैं अब बकस्वाहा भी मुंबई के नक्शे पर चमक उठा है।

भक्ति का मेला, एकता का पर्व

लालबाग की भव्यता, कृष्ण जन्मोत्सव की झूमती भीड़ और भागवत कथा की रसधारा—इन तीनों ने मिलकर बकस्वाहा को उत्सव का तीर्थ बना दिया है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु यही कहता है कि यह सिर्फ गणेश उत्सव नहीं, यह हमारी आत्मा का उत्सव है।

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Author: Parinda Post

सरहदें इंसानों के लिए होती हैं, परिंदा तो आज़ाद होता है !

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