मेला ग्राउंड में लगने वाली प्रदर्शनी का कपड़ा व्यापारियों ने किया ​विरोध, रोक लगाने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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●दुकानदार बोले- एक तो ऑनलाइन बिक्री से प्रभावित हुआ उनका व्यापार,दूसरी मेला ग्राउंड में प्रदर्शनी लगने से व्यापार पूरी तरह से बंद होने की कगार पर

परिंदा पोस्ट छतरपुर। छत्रसाल चौराहा से अदालत रोड पर अपनी निजी दुकानों में व्यापार करने वाले दुकानदारों ने सामूहिक रूप से मेला ग्राउंड में लगने वाली मेला प्रदर्शनी का विरोध जताया है। इसके ​लिए सभी दुकानदार एवं व्यापारी सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मेला प्रदर्शनी लगवाने की मांग की है। उन्होने साफ तौर पर कहा कि, प्रदर्शनी लगने से उनका व्यापार बंद होने की कगार पर है। जिसको ध्यान में रखते हुए मेला प्रदर्शनी पर रोक लगाई जाए।

दुकानदारों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि, शहर के मेला ग्राउंड के आधे हिस्से में प्रशासन के द्वारा मेला प्रदर्शनी लगाने की अनुमति दी जाती है। जिससे यहां साल भर में 6-7 महीने प्रदर्शनी का आयोजन होता है। ऐसे में स्थानीय दुकानदारों के व्यापार पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और कुछ छोटे दुकानदारों का व्यापार ठप होने की कगार पर है। मेला ग्राउंड की जमीन नजूल शाखा की है, जिसमें नियमानुसार कलेक्टर महोदय को इसकी परमिशन देने का अधिकार रहता है। लेकिन नगर पालिका सीएमओ और एसडीएम मेला ठेकेदारों को ग्राउंड की जमीन गुपचुप तरीके से आवंटित कर देते है। जिससे स्थानीय दुकानदारों के द्वारा इसका विरोध करने के बाद भी कहीं सुनवाई नहीं होती है। मेला प्रदर्शनी लगने से कपड़ा व्यापारियों की दुकानदारी प्रभावित होती है। क्योकिं सबसे अधिक कपड़े की बिक्री गर्मी और ठंडी के मौसम में होती है। लेकिन इस दौरान बाहर के व्यापारी मेला ग्राउंड में अपनी दुकाने लगाते है। ऐसे में शहर के छोटे दुकानदार परेशान हो रहे हैं।मेला ग्राउंड में लगातार दो-दो माह तक प्रदर्शनी लगने से यहां रात के समय मेला ठेकेदार और उनके दुकानदार नशाखोरी भी करते है, जिससे शाम 7 बजे के बाद मेला ग्राउंड असमाजिक तत्वो का अड्‌डा बन जाता है। मेला प्रदर्शनी लगाने वाले ठेकेदार लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा देने के नाम पर अधिकारियों को गुमराह करते हैं। जिसके चलते प्रदर्शनी में लगने वाली 90 फीसदी दुकाने बाहर की रहती हैं। मेला ग्राउंड की जमीन में रविवार हॉट बाजार के लिए​ चिंहित है, जिसके चलते यहां सब्जी मार्केट लगता था। लेकिन बीते तीन सालों से आधे ग्राउंड में प्रदर्शनी लगने के कारण सब्जी दुकानदारों का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। उन्हें अपनी दुकाने लगाने के लिए कहीं स्थान नहीं मिलता तो वह सड़क किनारे अपनी दुकाने लगाते हैं। ​जिससे आवागमन भी बाधित होता है। 

प्रदर्शनी के लिए ग्राउंड ​देने की पूरी प्रक्रिया नियम विरूद्ध तरीके से की जाती है। जिससे इसमें पारदर्शिता न होने से इसकी जानकारी स्थानीय व्यापारियों को नहीं मिल पाती। बाहरी ठेकेदार सीधे ​अधिकारियों से संपर्क कर इसकी परमिशन करा लेते हैं। व्यापारियों ने मांग की है कि, विभिन्न बिंदुओं की जांच कराते हुए मेला प्रदर्शनी पर रोक लगाई जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान बल्देव प्रसाद चौर​सिया, जय प्रकाश पहारिया, पुष्पेंद्र कुमार चौरसिया, रामस्वरूप चौर​सिया, नूर इस्लाम, जय प्रकाश अग्रवाल, राजू चौरसिया, रामप्रसाद रैकवार, कोमल असाटी, राजू असाटी, कैलाश, जगप्रसाद के साथ अन्य लोग मौजूद रहे। 

●प्रदर्शनी लगने से लोकल के दुकानदारों को नुकसान

कपड़ा व्यापारी धरमदास गुप्ता ने बताया कि, हम सब दुकानदार अपने परिवार का भरण-पोषण करने के ​लिए दुकानदारी करते है। इसके लिए अधिकतर दुकानदार कर्ज लेकर माल खरीदते हैं। लेकिन मेला ग्राउंड में प्रदर्शनी लगने से उनकी ​बिक्री नहीं होती है। ऐसे में उनकी दुकानदारी बंद होने की कगार पर है। दुकानदारों के हित को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शनी पर रोक लगाई जाने चा​हिए। जिससे लोकल के व्यापारी अपना व्यापार सुचारू रुप से कर सकें। नरेंद्र कुमार चौरसिया ने बताया कि, ऑनलाइन की वजह से पहले से ही उनकी दुकानदारी प्रभावित है। वहीं बाहरी दुकानदार मेला प्रदर्शनी में आकर मेला लगाकर लोकल के दुकानदारों को बड़े स्तर से नुकसान पहुंचा रहे है।

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Author: Parinda Post

सरहदें इंसानों के लिए होती हैं, परिंदा तो आज़ाद होता है !

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