अशोक नामदेव खजुराहो (बमीठा)। झाँसी खजुराहो फोरलेन पर स्थित बमीठा कस्बे में इन दिनों एक अजीब विडंबना ने जनजीवन को थाम रखा है, जहां बमीठा स्थित सड़क के नीचे तीन पुलिया तो हैं, मगर उनसे जुड़ने वाले बरसाती नाले ही “गायब” हैं! परिणामस्वरूप पानी का निकास रुक गया और दलित बस्ती सहित पुलिस थाना परिसर पानी-पानी हो गया है। बताया जा रहा हैं कि दलित परिवारों सहित आसपास के कई घरों में पानी भरने से उनके घरों में तीन दिन से चूले तक नहीं जले हैं,स्थानीय निवासी रेखा करोसिया, कमला करोसिया, नितेश करोसिया, सगुन वाई बंसकार, संतोष बंसकार जैसे परिवारों के घरों में पानी घुस गया, अनाज सड़ गया, बिस्तर भीग गए और बच्चे भूखे सोने को मजबूर हो गए।
नालों को खोजने आय अफसर खाली हाथ लौटे
तेज बारिश के बाद सड़क जलभराव से बंद हो गई, तो एसडीएम प्रशांत अग्रवाल, तहसीलदार धीरज गौतम, राजस्व अमला और पुलिस बल मौके पर पहुंचे, जहां एसबीआई बैंक के सामने और पन्ना हाईवे रोड के नीचे पुलिया तो मिली, लेकिन बरसाती पानी की निकासी के लिए जरूरी नाले को खोजने में अफसर नाकाम रहे। जिसके चले वे दलितों के घरों में पानी भरा छोड़ लौट गए।
थाना परिसर भी डूबा — 84 साल की इमारत में पहली बार पानी घुसा
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार जहाँ सन 1940 में अंग्रेजों के ज़माने से खड़ी थाने की बिल्डिंग ने कभी बरसात की मार नहीं झेली थी, वहीं इस बार तेज बारिश में थाना परिसर से लेकर पुलिसकर्मियों के आवासीय मकानों सहित अन्य स्थानीय लोगों के मकानों में तेज बारिश का पानी भर गया हैं। बमीठा पंचायत के दलित मोहल्ले के स्थानीय लोग प्रशासनिक उपेक्षा की शिकायत करते हुए कहते हैं कि जब तक मीडिया खबर नहीं दिखाता, कोई पूछने भी नहीं आता। दलित मोहल्ले में जलभराव से बेहाल लोग आज भी उसी गंदे पानी में जीने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि अब तक न तो कोई विधायक, न सांसद और न ही जिला या पंचायत स्तर का कोई अधिकारी पीड़ित परिवारों का हालचाल लेने आया है। प्रशासन की चुप्पी और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी ने ग्रामीणों को हताश कर दिया है। दलित बस्ती की महिलाएँ, बुजुर्ग और बच्चे लगातार तीन दिन से भूखे पेट सोने को मजबूर हैं।
Author: Parinda Post
सरहदें इंसानों के लिए होती हैं, परिंदा तो आज़ाद होता है !

