नरेंद्र दीक्षित बड़ामलहरा। गांधीनगर स्थित आल्हा चौक पर 8 जून दिन रविवार को संविधान बचाओ सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्री गुड्डू भाई जी के आवास पर आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस जिला अध्यक्ष संतोष कुमार धुरिया ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कांग्रेस जिला संयोजक राहुल राय एवं वरिष्ठ नेता अनुज मिश्रा रहे। संचालन वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने किया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने संविधान की गरिमा, उसकी रक्षा और वर्तमान परिस्थितियों में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। अध्यक्षीय संबोधन में संतोष कुमार धुरिया ने कहा, “हमारा संविधान वर्षों की मेहनत का परिणाम है, जिससे हमें समानता, स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति का अधिकार प्राप्त हुआ है।वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मिश्रा ने कहा कि पार्टी में अनुशासन जरूरी है और जो लोग पार्टी को भीतर से कमजोर कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। कुंवर राकेश सिंह ने भारत के संविधान को दुनिया का सबसे श्रेष्ठ संविधान बताते हुए कहा कि “इसे कोई भी सरकार बदल नहीं सकती। डॉ. प्रमोद निरंजन ने कहा कि वर्तमान सरकार नागरिकों के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जो संविधान विरोधी है।
अरविंद द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा, “हमारे महापुरुषों ने संविधान को दिन-रात मेहनत कर तैयार किया है, इसे कोई भी सरकार आसानी से नहीं बदल सकती। राजीव खान ने भी अनुशासन पर बल देते हुए पार्टी विरोधी गतिविधियों पर कार्रवाई की मांग रखी। कार्यक्रम के अंत में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें कहा गया कि जो लोग पार्टी को लगातार नुकसान पहुँचा रहे हैं, उनके विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।
कार्यक्रम में लगभग पांच दर्जन से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। जिनमें प्रमुख रूप से –देवदत्त तिवारी, राहुल मिश्रा एडवोकेट, मुकेश सक्सेना, अंकुर पाराशर, प्रिंस मंसूरी, कुंवर राकेश सिंह, देशराज रैकवार, पंकज रैकवार, बलदेव प्रसाद एडवोकेट, डॉ. राकेश सिंह टिकैत, अरविंद चौधरी, डॉ. प्रमोद निरंजन, अरविंद द्विवेदी, रामकिशोर सोनी, महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट, हरिश्चंद्र राजपूत, शैलेंद्र विश्वकर्मा, जितेंद्र राजपूत, वीरेंद्र मांझी, राजीव खान, प्रमोद कुमार, राम मनोहर सिंह, छत्रपाल यादव, संतोष रैकवार, अजीज खान, वीरेंद्र पाराशर, अजय पाल, केशव अहिरवार, बृजमोहन अनुरागी, लालचंद, भानदू प्रसाद, भग्गू कुशवाहा, लालमणि, लक्ष्मण प्रसाद आदि शामिल रहे।
Author: Parinda Post
सरहदें इंसानों के लिए होती हैं, परिंदा तो आज़ाद होता है !

