दो माह से मानदेय नहीं, सचिवों के पास अतिरिक्त प्रभार – ग्राम रोजगार सहायकों ने जिला प्रसासन को सौंपा ज्ञापन : दी आंदोलन की चेतावनी

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

आशीष चौरसिया बकस्वाहा| लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे ग्राम रोजगार सहायकों ने मंगलवार को सहायक सचिव संघ के बैनर तले कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और जनपद पंचायत सीईओ को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी भगवत पटेल को सौंपा हैं। ज्ञापन में शासन से दो माह से लंबित मानदेय के शीघ्र भुगतान और अतिरिक्त वित्तीय प्रभार सचिवों से हटाकर ग्राम रोजगार सहायकों को सौंपने की मांग की गई। ग्राम रोजगार सहायकों का कहना है कि दो-दो महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण वे परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया कि रोजगार सहायकों के हालात इतने खराब हो गए हैं कि रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, स्वतंत्रता दिवस और गणेश चतुर्थी जैसे त्यौहार भी हम लोगों ने खाली जेब के साथ गुजारे हैं।

सहायक सचिव संघ बकस्वाहा ब्लॉक अध्यक्ष सुनील यादव ने ज्ञापन सौंपते समय कहा कि हम लगातार पंचायत स्तर पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन दो माह से मानदेय नहीं मिला। शासन ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि अतिरिक्त वित्तीय प्रभार हमें सौंपा जाए, मगर आज भी प्रभार सचिवों के पास है, जिससे भुगतान और विकास कार्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। संघ के सदस्य हीरासिंह ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि त्योहारों पर बच्चों के लिए कपड़े तक नहीं खरीद पाए। सरकार हमारी मेहनत का मूल्य समय पर नहीं दे रही और सचिवों के पास वित्तीय प्रभार होने से योजनाओं में भी देरी हो रही है। वहीं, सदस्य सुरेंद्र सिंह ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मानदेय का शीघ्र भुगतान नहीं हुआ और वित्तीय प्रभार हमें नहीं सौंपा गया, तो हम आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

शासन के आदेश और वास्तविकता में विरोधाभास

गौरतलब है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा 05 जनवरी 2025 को जारी आदेश (क्रमांक/पंचा.राज/एफ-6/ग्रा.पं. सचिव-724193/2025/6240) में ग्राम पंचायत सचिवों के प्रभार के संबंध में स्पष्ट किया गया है कि पंचायत कार्यों में किसी प्रकार का व्यवधान न आए। उक्त आदेश में मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 69 (1) व 69 (4) का उल्लेख करते हुए यह व्यवस्था दी गई है कि अनुपस्थिति या अवकाश की स्थिति में विहित प्राधिकारी तत्काल वैकल्पिक इंतज़ाम करेगा।

इसके बावजूद, मानदेय का महीनों से लंबित रहना और अतिरिक्त वित्तीय प्रभार सचिवों के पास होना शासन के आदेशों और जमीनी हकीकत के बीच गहरा विरोधाभास दर्शाता है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय पर मानदेय का भुगतान नहीं हुआ और वित्तीय प्रभार का हस्तांतरण नहीं किया गया तो आगामी दिनों में व्यापक आंदोलन की रूपरेखा बनाई जाएगी।

Parinda Post
Author: Parinda Post

सरहदें इंसानों के लिए होती हैं, परिंदा तो आज़ाद होता है !

और पढ़ें