नाटक ने की ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था पर चोट,कबीर और पंत के गीतों से महका मंच

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तीस दिवसीय बाल रंग शिविर का हुआ रंगारंग समापन

 

परिंदा पोस्ट छतरपुर। शहर के गांधी आश्रम में आयोजित तीस दिवसीय बाल रंग शिविर का रंगारंग समापन सोमवार को मुक्ताकाशी मंच पर विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। बच्चों ने योग, गीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से अपनी प्रतिभा का मनमोहक प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस मौके पर डॉ बहादुर सिंह परमार, गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष संतोष द्विवेदी, प्रेमनारायण मिश्र, शंकरलाल सोनी, कमल अग्रवाल, आभा श्रीवास्तव सहित अन्य अतिथि मंचासीन रहे।

दो घंटे तक चलीं रंगारंग प्रस्तुतियां

शिविर के दौरान प्रशिक्षकों के निर्देशन में बच्चों ने जो सीखा, उसे समवेत रूप से मंच पर प्रस्तुत किया। सबसे पहले राजेश कुशवाहा के निर्देशन में योग के विभिन्न आसनों का प्रदर्शन किया गया। इसके पश्चात महेंद्र तिवारी के निर्देशन में बुंदेली लोकगीतों के साथ कबीर, बुल्ले शाह, सुमित्रानंदन पंत और राजेश जोशी की कविताओं का सामूहिक सुमधुर गायन किया गया।

विशेष बात यह रही कि इन प्रस्तुतियों में संगत भी शिविर के बच्चों द्वारा दी गई। तबला और क्लैप बॉक्स पर सिद्धार्थ शुक्ला, सार्थक शुक्ला, सार्थक तिवारी और दर्श तिवारी ने संगत की, जबकि ढोलक पर लखन अहिरवार ने सहयोग किया। नृत्य प्रस्तुति में सीनियर और जूनियर दो टीमों ने निशांत वाल्मीकि एवं अंजली तिवारी के निर्देशन में धमाकेदार नृत्य प्रस्तुत किया।

कलाकृतियों से सजी आर्ट एंड क्राफ्ट गैलरी

मंचीय कार्यक्रम के साथ ही एक ओर बच्चों की आर्ट एंड क्राफ्ट गैलरी भी लगाई गई थी। अंकित पाल, अनामिका कुशवाहा, कृतिका प्रजापति, अनन्या वर्मा व श्रुति चौरसिया के निर्देशन में बच्चों ने विविध आकर्षक कलाकृतियों का निर्माण किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

नाटक ‘भणाई’ ने दिखाई ग्रामीण शिक्षा की सच्चाई

कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति के रूप में नाटक ‘भणाई’ मंचित किया गया। वरिष्ठ रंगकर्मी शिवेन्द्र शुक्ला ने बताया कि नाटक में ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की मनमानी, मध्याह्न भोजन की अव्यवस्था और पढ़ाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति जैसे गंभीर विषयों को बच्चों ने रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया।

नीरज खरे ने बताया कि इस नाटक में करीब 35 बच्चों ने अभिनय किया। इतनी बड़ी टीम को निर्देशित करना निर्देशक द्वय अभिदीप और रवि के लिए चुनौतीपूर्ण था, किंतु सभी बच्चों ने अपनी भूमिका को पूरी जिम्मेदारी से निभाया।

कार्यक्रम का संचालन कृष्णकांत मिश्रा, श्रुति चौरसिया और अनिका सिंह ने किया। अंत में गांधी आश्रम की सचिव दमयंती पाणी ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, प्रतिभागी बच्चों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावक व नगर के नागरिक उपस्थित रहे।

Parinda Post
Author: Parinda Post

सरहदें इंसानों के लिए होती हैं, परिंदा तो आज़ाद होता है !

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